एक अकेला/अकेली इस शहर में,
मित्रो आज कल नॉएडा की दो बहनों की चर्चा इन दिनों मीडिया में चर्च का विषय बनी हुई है.जिन्होंने लगभग दो वर्षो से अपने आप को अपने ही फ्लैट में कैद कर लिया था.पड़ोसियों को इस बात की भनक तक नहीं लगी.
यह हमारे तथाकथित सभ्य समाज के सामने बड़ी चुनोती है की महानगरो के concrete के जंगल में मानवता को भूलते जा रहे है.जैसे -जैसे लोगो की संख्या बढती जा रही है वैसे- वैसे संवेदनशीलता कम होती जा रही है.फिर इस तरह की घटना की शिकार महिलाए ही हुई है यह भी चिंता का विषय है.आधुनिक समाज में अकेलेपन के कारण अवसाद या depression की घटाने बढाती जा रही है लोग सेल्फ centered होते जा रहे है.आस पास कालोनी में,सोसाइटी में क्या हो raha है किसी को कोई लेना देना नहीं है.
जिंदगी की रहो में रंज ओ गम के मेले है,
भीड़ है क़यामत की
फिर भी हम अकेले है!
जो भी मेरे मित्र या पाठक ब्लॉग पढ़ रहे है उनसे मै हमेशा ही request करता हूँ -कभी भी जीवन में कितनी ही समस्याए आये हमें कभी होसला नहीं खोना है हिम्मत से प्रोब्लेम्स का सामना करना है.
जो हमारे समाज के प्रमुख लोग है उनकी ये जिम्मेदारी बनती है की सोसाइटी में ऐसी घटनाओ की पुनरावृति न हो , सभी लोग एक दूसरे से जुड़े एक दूसरे का दुःख दर्द समझे ये ही सभ्य समाज की निशानी है :
इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा !
यही पैगाम हमारा !!
आप सभी के स्नेह के लिए धन्यवाद
आपका मित्र राजेश भरद्वाज
9001896628
जिंदगी की रहो में रंज ओ गम के मेले है,
भीड़ है क़यामत की
फिर भी हम अकेले है!
जो भी मेरे मित्र या पाठक ब्लॉग पढ़ रहे है उनसे मै हमेशा ही request करता हूँ -कभी भी जीवन में कितनी ही समस्याए आये हमें कभी होसला नहीं खोना है हिम्मत से प्रोब्लेम्स का सामना करना है.
जो हमारे समाज के प्रमुख लोग है उनकी ये जिम्मेदारी बनती है की सोसाइटी में ऐसी घटनाओ की पुनरावृति न हो , सभी लोग एक दूसरे से जुड़े एक दूसरे का दुःख दर्द समझे ये ही सभ्य समाज की निशानी है :
इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा !
यही पैगाम हमारा !!
आप सभी के स्नेह के लिए धन्यवाद
आपका मित्र राजेश भरद्वाज
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