Wednesday, October 19, 2011

HAPPY DIWALI

हैप्पी दिवाली
                    मित्रों साथियों दोस्तों आप सभी  को हैप्पी दिवाली!
                    आज मै अपने छोटे छोटे प्यारे प्यारे दोस्तों से कुछ बाते शेयर करना चाहता हूँ.दोस्तों दीवाली मनानी है! जोर शोर के साथ मनानी है.पटाखे फुलझरी जलाने है और आप के घर में शायद कुछ स्वीट बन रही है मुझे उसकी खुशबु आ रही है.तो खूब दीवाली का फेस्टिवल एन्जॉय करने के लिए हम सब तैयार है.अरे रे रे ये किसने जोर से अटम बोम्ब चलाया मेरे कान में अभी तक धमाके की आवाज गूँज रही है.अरे भाई कम आवाज वाले पटाखे चलाइये किसी को तेज आवाज से तकलीफ हो सकती है.
                रोशनी करने वाली आतिशबाजी  मुझे अच्छी  लगती है,रोशनी की बात से याद आया आप के पड़ोस में रहने वाले गरीब बच्चो के पास शायद पटाखे कपडे आदि नहीं होते है,आप उनकी मदद कर उनके जीवन में भी रोशनी कर सकते है.कुछ पटाखे प्रदुषण    भी फैलाते है इनका इस्तेमाल भी कम से कम करे.
                  एक बार फिर सभी मित्रो को दिवाली की शुभकामनाये!
                  खूब एन्जॉय करे जो मित्र इंडिया से बाहर रहते है उन्हें दिवाली की बहुत बहुत शुभकानाए  शेष फिर !    

                आपका मित्र राजेश भरद्वाज          

Wednesday, October 5, 2011

जिद करो दुनिया बदलो

जिद करो दुनिया बदलो,
                                     मित्रो आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!
                                     मित्रो वैसे सामान्यतः जिद करना अच्छा नहीं माना    जाता है,परन्तु यदि हम जिद को एक संकल्प के रूप में देखे तो बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे.
                                      जो जीवन में हमारा लक्ष्य है चाहे वह लक्ष्य हमें बड़ा या कठिन प्रतीत होता परन्तु यदि हम मन में दृढ इच्छा शक्ति के साथ उसे पूरा करने का प्रयास करेंगे, तो उस लक्ष्य को हम अवश्य प्राप्त कर लेंगे.एक जिद के साथ, एक संकल्प शक्ति के साथ पूरी ताकत और सामर्थ्य के साथ उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें जुट जाना चाहिए.फिर कोई भी कठिन लक्ष्य हो हमें सफलता अवश्य मिलेगी.
                                      लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में यदि छोटी या बड़ी बाधाएं आए हमें दृढ़ता के साथ उनका समाधान करना चाहिए.एक जिद्दी बच्चे की तरह अपनी जिद या संकल्प को अवश्य पूरा करना चाहिए.
                                      संकट में हे धीर वीर तू बढ़ता चल!
                                      बाधाओ को चिर वीर   तू बढ़ता चल !!

Saturday, August 27, 2011

अन्ना हजारे की जीत VICTORY OF ANNA HAJARE

अन्ना हजारे की जीत,
                                  मित्रो अन्ना हजारे दृढ संकल्प के साथ अनशन पर बैठे है.जन लोक पाल को लागू करने के लिए सारे देश से विशेष कर युवा वर्ग से उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है.देश का आम नागरिक जो भ्रष्टाचार से जूझ रहा  है अन्ना के साथ है.जनता चाहती है जो पैसा वह सरकार को टैक्स के रूप में देती है,वो पैसा सरकार ईमानदारी से विकास कार्यो में लगाये.रोज मर्रा के कामो के लिए उसे रिश्वत न देनी पड़े. 
                                विपक्षी दल आधे अधूरे  मन से अन्ना का साथ देने का दम भर रहे है.उन्हें अन्ना का खुले मन से समर्थन करना चाहिए.भ्रष्टाचार से देश के लोग मुक्ति चाहते है ये बात सभी राजनैतिक दलों को समझ लेनी चाहिए.
                                 आइये हम सब अन्ना और आम जनता की जीत के लिए उनका साथ दे
                                 

                  

Sunday, August 14, 2011

PUSTAK MITRA पुस्तक मित्र


 पुस्तक मित्र,

मित्रो आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !

वर्त्तमान समय में हम सभी मनोरंजन के लिए टी वी देखते है या कंप्यूटर पर सर्फिंग करते है या नेट पर चेटिंग करते है.परन्तु मेरा ये मानना है की पुस्तके हमें सही मार्ग दर्शन देती है,पुस्तके ही सच्ची  मित्र है.महापुरुषों की जीवनी पढ़ कर हमें जीने की सही राह  मिलती है,अच्छा साहित्य हमारा स्वस्थ मनोरंजन करता है.

पुस्तको को हम यात्रा के दोरान पढ़ कर हम समय व्यतीत कर सकते है.अवकाश के समय में भी पुस्तके बेहतर साथी होती है.वर्तमान में युवा पीढ़ी पुस्तकों से दूर होती जा रही है.बर्थ डे आदि  अवसरों पर सभी आयु वर्ग के लोगो को उनकी रूचि के अनुसार पुस्तके भेट में दी जा सकती है.बच्चो को कॉमिक्स युवा वर्ग को प्रतियोगिता में सफलता पाने की पुस्तके तो बुजुर्ग लोगो को धार्मिक पुस्तके भेट में दी जा सकती है.

अच्छी पुस्तके हमें निराश से आशापूर्ण जीवन की और ले जाती है.

अच्छी पुस्तके पढ़िए  आगे बढिए
 

BE A GOOD CITIZEN अच्छे एवं जागरूक नागरिक बनिए

BE A GOOD CITIZEN
अच्छे एवं जागरूक नागरिक बनिए

सभी भाई - बहिनों को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!
मित्रो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मै आपसे कुछ आग्रह कुछ अनुरोध करना चाहता हूँ.देश को आज़ादी मिले इतने वर्ष हो गए फिर भी देश के नागरिक मूलभूत सुविधाओ से वंचित है.जैसे अच्छी सड़के,स्वच्छ पीने  का पानी,शहर गाँव में स्वछता का अभाव.इन सब समस्याओ का मूल कारण क्या है ? इसका मूल कारण है जिन जन प्रतिनिधियों को हमने चुना है उनमे इच्छा शक्ति का अभाव और हम नागरिको में जागरूकता का अभाव.

आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम ये प्रतिज्ञा ले की जब भी हम नेताओ से मिलेंगे तब उन पर इन समस्याओ को दूर करने हेतु दबाव बनायेंगे.साथ ही उन्हें ये अहसास दिलाएंगे की जब. तक वे इन समसयाओ से हमें मुक्ति नहीं दिलाते है,अगले चुनावो में उनका जीतना असंभव है.

साथ ही आपसे ये अनुरोध है की जो लोग व्यवस्था में सुधार हेतु जो लोग [जैसे अन्ना हजारे या बाबा रामदेव] संघर्ष कर रहे है उनका जी जान से समर्थन करे.इन्ही लोगो को अपना हीरो माने.भ्रष्ट नेताओ या फ़िल्मी अभिनेताओ को नहीं.समर्थन नहीं भी करे तो अनावश्यक रूप से उनका विरोध न करे.
      शेष फिर!
\                               जय हिंद


Friday, July 29, 2011

संसार मुसाफिरखाना है WORLD IS AN INN

संसार मुसाफिरखाना है

                                    मित्रो ये संसार एक मुसफिखाना या एक होटल के सामान है.हर व्यक्ति इस संसार रूपी होटल में अधिक से अधिक रुकना चाहता है.परन्तु क्या इस संसार रूपी होटल या सराय में वह अपनी इच्छा से रुक सकता है?
                       
                                    नहीं मित्रो बिलकुल नहीं इस होटल का मालिक बड़ा कठोर है? वह कभी भी किसी को भी अपने होटल से बाहर कर देता है, उस के दिल में दया नहीं है.वह छोटा देखता है न बड़ा,बच्चा देखता है   न बूढ़ा.आमिर देखता है न गरीब न दिन देखता है न रात.कभी भी होटल खली करने का हुकम दे देता है

                                  मेरी बहने-भाई बहुत सी सांसारिक वस्तुओ का संग्रह करते है -वह सब धरी रह जाती है,होटल का मालिक कुछ भी साथ ले जाने की आज्ञा नहीं देता है,इतना जानते हुए भी मेरे भाई बहने सांसारिक वस्तुओ के संग्रह में अपने जीवन का अनमोल समय गँवा देते है.कुछ लोग तो धन प्राप्ति के लिए किसी भी सीमा तक दूसरो को पीड़ा देते है,क्या ये उचित है?

                             मित्रो हमें कभी भी ये संसार रूपी होटल कभी भी खाली करना पड़ सकता है,जीवन  बहुत सरलता के साथ ,लालच रहित,कपट रहित जीने का प्रयास करे.दूसरो को सुख ना दे सके तो दुःख भी ना दे.यही जीवन का सार है.

Thursday, July 28, 2011

SALUTE TO INDIAN PARENTS

भारतीय अभिभावकों को सलाम !

                                                     मित्रो आप सभी को मेरा स्नेह भरा नमस्कार! ये ब्लॉग भारतीय
अभिभावकों को समर्पित है.

                                                    वर्तमान समय में भारतीय पेरेंट्स बच्चे के जन्म के समय से ही उसके लिए चिंतित होना प्रारंभ कर देते है.नर्सरी कक्षा से ही बच्चे की पढाई की चिंता करने लग जाते है.अभिभावक सोचते है की उनका बच्चा जल्दी से जल्दी ज्ञानी बन जाये.

                                                     उसके लिए हर प्रकार के महंगे  से महंगे ब्रांडेड कपडे,खिलोने आदि लाते है.मध्यम वर्गीय परिवारों में बच्चे का पालन पोषण उच्च स्तरीय ढंग से किया जाता है.बच्चो की हर फरमाइश को पूरा किया जाता है.छोटे बच्चो को विडिओ गेम,मोबाइल आदि लाकर दिए जाते है.
                                                    बच्चो के बड़े होने पर मोटर साइकिल,स्कूटी आदि पेरेंट्स उन्हें बिना मांगे लाकर देते है.उच्च शिक्षा पर लाखो रुपये व्यय लोन लेकर भी करने को तैयार रहते है.इसी उम्मीद के साथ : फ़िल्मी गाना याद आ रहा है :

                                                   तुझे सूरज कहू या चंदा
                                                   तुझे दीप कहू या    तारा !
                                                   मेरा नाम करेगा रोशन
                                                   जग में मेरा राज दुलारा !!
         
                                                  बच्चे  कितना नाम रोशन करते  है ये देखने वाली बात है!

                                                  शेष चर्चा अगले ब्लॉग में,

                                                  आपका मित्र
         
                                                  राजेश भारद्वाज