Wednesday, September 7, 2016

स्वच्छता अभियान 

मित्रो नमस्कार

स्वच्छता आज हमारे लिए एक विकराल समस्या बन चुकी है.भारत का हर शहर इस समस्या से झूज रहा है.
मेरे पास इस समस्या के समाधान के लिए कुछ सुझाव है। 


सर्वप्रथम हम इस समस्या के समाधान के लिए सरकार पर निर्भर न रहे.


व्यसायिक प्रतिष्ठान के मालिक अपने आस पास का क्षेत्र स्वयं स्वच्छ करवा  सकते है  
कूड़ा आदि निर्धारित स्थान डाल  कर मार्किट को साफ़ सुथरा रख सकते है। 


इसी प्रकार कॉलोनी के वासी भी अपनी कॉलोनी में व्यक्तिगत आधार पर सफाई करा कर कॉलोनी को साफ़ सुथरा रख सकते है। 

आज हम मौज मस्ती पर धन व्यय करते है, स्वच्छता  भी कुछ धन व्यय कर हम शहर को साफ़ सुथरा बना सकते है.स्वच्छता में लक्ष्मी का निवास होता है.

जन प्रतिनिधियो पर को भी इस कार्य बना सकते है। 

बहुत से समर्थ व्यक्ति सामाजिक कार्यो में धन देने हेतु तत्पर रहते है इन लोगो का सहयोग लेकर भी स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाया जा सकता है। 

हमारे बच्चे है कृष्ण राधा। 
गंदगी इनके विकास में क्यों बने बाधा। 

क्या हम आने वाली पीढ़ी को कचरे से भरा  देश विरासत में देकर जायेंगे ?

Tuesday, April 10, 2012

लाइफ में संगीत का तड़का

लाइफ में संगीत का तड़का,
                                            प्रिय मित्रो राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !
                                             मित्रो यदि आपकी लाइफ बोरिंग,नीरस/बे मजा हो गई है तो निश्चित ही आपकी लाइफ रूपी खिचड़ी में संगीत का तड़का लगाना जरुरी हो गया है.
                                              बे रंग जीवन में रंग बहाना है तो संगीत का आनंद लेना  शुरू कर दीजिये.
                                              जीवन रूपी खिचड़ी में गज़लों की हींग,गीतों का जीरा ,धार्मिक भजनों के घी का तड़का लगा नहीं और आपका जीवन महक और चहक उठेगा.चाहे आपको फ़िल्मी गीत पसंद हो गज़ले पसंद हो या पुराने ओल्ड/गोल्ड फ़िल्मी सोंग्स.सभी का भरपूर आनंद लीजिये.आपके जीवन में पोजिटिव परिवर्तन आ जायेगा : एक फ़िल्मी गीत याद आ रहा है:
                                               
                                                    हर पल यहाँ जी भर जियो!
                                                    कल ये समां फिर हो न हो !!

Sunday, March 25, 2012

सब में है हीरो SAB ME HAI HERO

सब में है हीरो,
                       प्रिय मित्रो आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !
                       मित्रों हम सभी के मन में कही न कही एक हीरो या नायक होने का भाव छुपा   होता  है.इसी भाव के साथ हम सर उठा के जीते है.नायक या हीरो होने का अर्थ है मन में कुछ सकारात्मक करने  या अच्छा बनने की भावना!
                        युवा मित्रो में हीरो होने का भाव ज्यादा प्रबल होना चाहिए.जीवन में उन्हें बहुत कुछ करना है.भविष्य में कुछ बनना है.लक्ष्य हासिल कैसे करेंगे जब सही दिशा में प्रयास करेंगे.
                        हीरो होने की भावना ही हमें समाज के लिए या देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित करती है.जैसे आज के समय में श्री अन्ना हजारे जी हम लोगो के हीरो और सभी भारत वासियों की आँख के तारे बने हुए है.
                       मित्रो मेरा आपसे अनुरोध है की अपने स्तर पर हमेशा समाज और देश के लिए यथा संभव अच्छे कार्य करने  का प्रयास करना चाहिए.अब सोचने का समय समाप्त हो चुका है - अब कुछ कर दिखने का वक्त है

Saturday, December 31, 2011

नव वर्ष की शुभ कामनाये HAPPY NEW YEAR

नव वर्ष की शुभ कामनाये,
                                     प्रिय मित्रो !
                                     आपको विशेषकर युवा मित्रो को मेरी और से नव वर्ष की शुभ कामनाये *
                                     मित्रो नया वर्ष आता है और साथ में खुशिया लाता है,और युवा मित्रो के लिए नयी -नयी चुनोतिया लाता है.मित्रो मेरा आपसे अनुरोध है चाहे साधनों की कितनी भी कमी हो.कितनी भी रूकावटे हो हमें पूर्ण क्षमता के साथ एवं उत्साह के साथ लक्ष्य की पूर्ति हेतु प्रयास करना है.
                                     लक्ष्य की पूर्ति हेतु प्रयास प्रारंभ करना ही सफलता ही पहली सीढ़ी है.मित्रो जैसे ही हम प्रयास प्रारंभ करते है समझो की आधी सफलता हमें मिल गयी.सही दिशा में किये गए प्रयास हमें सफलता की और ले जाते है .
                    आप सभी को पुनः नए वर्ष २०१२ की हार्दिक शुभ कामनाये .

Friday, November 25, 2011

कुछ RIGID हो जाएँ

कुछ RIGID हो जाएँ !
                                मित्रों आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!
                                मित्रो आज हमारी प्रवृति समझोतावादी हो गयी है.जीवन की हर समस्या को हम टालने की प्रवृत्ति रखते है.मै उदाहरण के रूप में आपको हमारे शहरों की प्रमुख समस्या की और आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ.हमारे शहरों में विभिन्न स्थानों पर कूड़े कचरे के ढेर पड़े होते है - ज्यादातर हम नाक पर रूमाल रख कर निकल जाते है.

                              मै अपने ब्लॉग के माध्यम से इस समस्या के निराकरण हेतु कुछ सुझाव देना चाहता हूँ.हमारे धरम गुरुओ के बड़ी संख्या में शिष्य है,जो उनके इशारे पर कुछ भी करने को तत्पर रहते है.अभी कुछ दिनों पूर्व संत राम रहीम जी ने जयपुर में एक दिन का अभियान चला कर जयपुर की सफाई हेतु अभियान चलाया.मेरी दृष्टि में एक अनुकर्णीय व् सराहनीय प्रयास है.इसी प्रकार बाड़मेर राज के जिलाधीश ने जन सहयोग से शहर की सफाई हेतु अभियान चला कर जनता को अच्छा सन्देश दिया है.
                          इसी प्रकार यदि हम शहर की स्वछता हेतु सजग रहे तो काफी हद तक तो शहरों की छवि में सुधार कर सकते है!कुछ RIGID हो कर हम कूड़े को सही स्थान पर डाले.अपने बच्चो को भी इस बारे में जागरूक करे तब ही कुछ देश की बेहतर तस्वीर बन सकती है *

Wednesday, October 19, 2011

HAPPY DIWALI

हैप्पी दिवाली
                    मित्रों साथियों दोस्तों आप सभी  को हैप्पी दिवाली!
                    आज मै अपने छोटे छोटे प्यारे प्यारे दोस्तों से कुछ बाते शेयर करना चाहता हूँ.दोस्तों दीवाली मनानी है! जोर शोर के साथ मनानी है.पटाखे फुलझरी जलाने है और आप के घर में शायद कुछ स्वीट बन रही है मुझे उसकी खुशबु आ रही है.तो खूब दीवाली का फेस्टिवल एन्जॉय करने के लिए हम सब तैयार है.अरे रे रे ये किसने जोर से अटम बोम्ब चलाया मेरे कान में अभी तक धमाके की आवाज गूँज रही है.अरे भाई कम आवाज वाले पटाखे चलाइये किसी को तेज आवाज से तकलीफ हो सकती है.
                रोशनी करने वाली आतिशबाजी  मुझे अच्छी  लगती है,रोशनी की बात से याद आया आप के पड़ोस में रहने वाले गरीब बच्चो के पास शायद पटाखे कपडे आदि नहीं होते है,आप उनकी मदद कर उनके जीवन में भी रोशनी कर सकते है.कुछ पटाखे प्रदुषण    भी फैलाते है इनका इस्तेमाल भी कम से कम करे.
                  एक बार फिर सभी मित्रो को दिवाली की शुभकामनाये!
                  खूब एन्जॉय करे जो मित्र इंडिया से बाहर रहते है उन्हें दिवाली की बहुत बहुत शुभकानाए  शेष फिर !    

                आपका मित्र राजेश भरद्वाज          

Wednesday, October 5, 2011

जिद करो दुनिया बदलो

जिद करो दुनिया बदलो,
                                     मित्रो आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!
                                     मित्रो वैसे सामान्यतः जिद करना अच्छा नहीं माना    जाता है,परन्तु यदि हम जिद को एक संकल्प के रूप में देखे तो बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे.
                                      जो जीवन में हमारा लक्ष्य है चाहे वह लक्ष्य हमें बड़ा या कठिन प्रतीत होता परन्तु यदि हम मन में दृढ इच्छा शक्ति के साथ उसे पूरा करने का प्रयास करेंगे, तो उस लक्ष्य को हम अवश्य प्राप्त कर लेंगे.एक जिद के साथ, एक संकल्प शक्ति के साथ पूरी ताकत और सामर्थ्य के साथ उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें जुट जाना चाहिए.फिर कोई भी कठिन लक्ष्य हो हमें सफलता अवश्य मिलेगी.
                                      लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में यदि छोटी या बड़ी बाधाएं आए हमें दृढ़ता के साथ उनका समाधान करना चाहिए.एक जिद्दी बच्चे की तरह अपनी जिद या संकल्प को अवश्य पूरा करना चाहिए.
                                      संकट में हे धीर वीर तू बढ़ता चल!
                                      बाधाओ को चिर वीर   तू बढ़ता चल !!

Saturday, August 27, 2011

अन्ना हजारे की जीत VICTORY OF ANNA HAJARE

अन्ना हजारे की जीत,
                                  मित्रो अन्ना हजारे दृढ संकल्प के साथ अनशन पर बैठे है.जन लोक पाल को लागू करने के लिए सारे देश से विशेष कर युवा वर्ग से उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है.देश का आम नागरिक जो भ्रष्टाचार से जूझ रहा  है अन्ना के साथ है.जनता चाहती है जो पैसा वह सरकार को टैक्स के रूप में देती है,वो पैसा सरकार ईमानदारी से विकास कार्यो में लगाये.रोज मर्रा के कामो के लिए उसे रिश्वत न देनी पड़े. 
                                विपक्षी दल आधे अधूरे  मन से अन्ना का साथ देने का दम भर रहे है.उन्हें अन्ना का खुले मन से समर्थन करना चाहिए.भ्रष्टाचार से देश के लोग मुक्ति चाहते है ये बात सभी राजनैतिक दलों को समझ लेनी चाहिए.
                                 आइये हम सब अन्ना और आम जनता की जीत के लिए उनका साथ दे
                                 

                  

Sunday, August 14, 2011

PUSTAK MITRA पुस्तक मित्र


 पुस्तक मित्र,

मित्रो आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !

वर्त्तमान समय में हम सभी मनोरंजन के लिए टी वी देखते है या कंप्यूटर पर सर्फिंग करते है या नेट पर चेटिंग करते है.परन्तु मेरा ये मानना है की पुस्तके हमें सही मार्ग दर्शन देती है,पुस्तके ही सच्ची  मित्र है.महापुरुषों की जीवनी पढ़ कर हमें जीने की सही राह  मिलती है,अच्छा साहित्य हमारा स्वस्थ मनोरंजन करता है.

पुस्तको को हम यात्रा के दोरान पढ़ कर हम समय व्यतीत कर सकते है.अवकाश के समय में भी पुस्तके बेहतर साथी होती है.वर्तमान में युवा पीढ़ी पुस्तकों से दूर होती जा रही है.बर्थ डे आदि  अवसरों पर सभी आयु वर्ग के लोगो को उनकी रूचि के अनुसार पुस्तके भेट में दी जा सकती है.बच्चो को कॉमिक्स युवा वर्ग को प्रतियोगिता में सफलता पाने की पुस्तके तो बुजुर्ग लोगो को धार्मिक पुस्तके भेट में दी जा सकती है.

अच्छी पुस्तके हमें निराश से आशापूर्ण जीवन की और ले जाती है.

अच्छी पुस्तके पढ़िए  आगे बढिए
 

BE A GOOD CITIZEN अच्छे एवं जागरूक नागरिक बनिए

BE A GOOD CITIZEN
अच्छे एवं जागरूक नागरिक बनिए

सभी भाई - बहिनों को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!
मित्रो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मै आपसे कुछ आग्रह कुछ अनुरोध करना चाहता हूँ.देश को आज़ादी मिले इतने वर्ष हो गए फिर भी देश के नागरिक मूलभूत सुविधाओ से वंचित है.जैसे अच्छी सड़के,स्वच्छ पीने  का पानी,शहर गाँव में स्वछता का अभाव.इन सब समस्याओ का मूल कारण क्या है ? इसका मूल कारण है जिन जन प्रतिनिधियों को हमने चुना है उनमे इच्छा शक्ति का अभाव और हम नागरिको में जागरूकता का अभाव.

आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम ये प्रतिज्ञा ले की जब भी हम नेताओ से मिलेंगे तब उन पर इन समस्याओ को दूर करने हेतु दबाव बनायेंगे.साथ ही उन्हें ये अहसास दिलाएंगे की जब. तक वे इन समसयाओ से हमें मुक्ति नहीं दिलाते है,अगले चुनावो में उनका जीतना असंभव है.

साथ ही आपसे ये अनुरोध है की जो लोग व्यवस्था में सुधार हेतु जो लोग [जैसे अन्ना हजारे या बाबा रामदेव] संघर्ष कर रहे है उनका जी जान से समर्थन करे.इन्ही लोगो को अपना हीरो माने.भ्रष्ट नेताओ या फ़िल्मी अभिनेताओ को नहीं.समर्थन नहीं भी करे तो अनावश्यक रूप से उनका विरोध न करे.
      शेष फिर!
\                               जय हिंद


Friday, July 29, 2011

संसार मुसाफिरखाना है WORLD IS AN INN

संसार मुसाफिरखाना है

                                    मित्रो ये संसार एक मुसफिखाना या एक होटल के सामान है.हर व्यक्ति इस संसार रूपी होटल में अधिक से अधिक रुकना चाहता है.परन्तु क्या इस संसार रूपी होटल या सराय में वह अपनी इच्छा से रुक सकता है?
                       
                                    नहीं मित्रो बिलकुल नहीं इस होटल का मालिक बड़ा कठोर है? वह कभी भी किसी को भी अपने होटल से बाहर कर देता है, उस के दिल में दया नहीं है.वह छोटा देखता है न बड़ा,बच्चा देखता है   न बूढ़ा.आमिर देखता है न गरीब न दिन देखता है न रात.कभी भी होटल खली करने का हुकम दे देता है

                                  मेरी बहने-भाई बहुत सी सांसारिक वस्तुओ का संग्रह करते है -वह सब धरी रह जाती है,होटल का मालिक कुछ भी साथ ले जाने की आज्ञा नहीं देता है,इतना जानते हुए भी मेरे भाई बहने सांसारिक वस्तुओ के संग्रह में अपने जीवन का अनमोल समय गँवा देते है.कुछ लोग तो धन प्राप्ति के लिए किसी भी सीमा तक दूसरो को पीड़ा देते है,क्या ये उचित है?

                             मित्रो हमें कभी भी ये संसार रूपी होटल कभी भी खाली करना पड़ सकता है,जीवन  बहुत सरलता के साथ ,लालच रहित,कपट रहित जीने का प्रयास करे.दूसरो को सुख ना दे सके तो दुःख भी ना दे.यही जीवन का सार है.

Thursday, July 28, 2011

SALUTE TO INDIAN PARENTS

भारतीय अभिभावकों को सलाम !

                                                     मित्रो आप सभी को मेरा स्नेह भरा नमस्कार! ये ब्लॉग भारतीय
अभिभावकों को समर्पित है.

                                                    वर्तमान समय में भारतीय पेरेंट्स बच्चे के जन्म के समय से ही उसके लिए चिंतित होना प्रारंभ कर देते है.नर्सरी कक्षा से ही बच्चे की पढाई की चिंता करने लग जाते है.अभिभावक सोचते है की उनका बच्चा जल्दी से जल्दी ज्ञानी बन जाये.

                                                     उसके लिए हर प्रकार के महंगे  से महंगे ब्रांडेड कपडे,खिलोने आदि लाते है.मध्यम वर्गीय परिवारों में बच्चे का पालन पोषण उच्च स्तरीय ढंग से किया जाता है.बच्चो की हर फरमाइश को पूरा किया जाता है.छोटे बच्चो को विडिओ गेम,मोबाइल आदि लाकर दिए जाते है.
                                                    बच्चो के बड़े होने पर मोटर साइकिल,स्कूटी आदि पेरेंट्स उन्हें बिना मांगे लाकर देते है.उच्च शिक्षा पर लाखो रुपये व्यय लोन लेकर भी करने को तैयार रहते है.इसी उम्मीद के साथ : फ़िल्मी गाना याद आ रहा है :

                                                   तुझे सूरज कहू या चंदा
                                                   तुझे दीप कहू या    तारा !
                                                   मेरा नाम करेगा रोशन
                                                   जग में मेरा राज दुलारा !!
         
                                                  बच्चे  कितना नाम रोशन करते  है ये देखने वाली बात है!

                                                  शेष चर्चा अगले ब्लॉग में,

                                                  आपका मित्र
         
                                                  राजेश भारद्वाज

                                                
                        
                                          
                                             

Wednesday, July 27, 2011

SALUTE TO INDIAN HOUSEWIVES

भारतीय गृहणियो को सलाम,
                               
                                             मित्रो सर्वप्रथम आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार  !
                                             मित्रो शीर्षक से ही आप समझ गए होंगे की आज ब्लॉग में किसकी तारीफ के पुल बांधे जायेंगे.
                                             भारतीय गृहणिया प्रातः कल से ही घर के कम काज में व्यस्त हो जाती है.बहुत प्रसन्नता के साथ बच्चो का टिफिन तैयार करना ,पति के लिए टिफन तैयार करना.बच्चे,पति के कपडे प्रेस इत्यादि कर तैयार करना.घर को साफ  सुथरा रखना,घर को मकान के स्थान पर मंदिर के रूप में परिवर्तित  करना भारतीय गृहणी द्वारा ही संभव है.

                                          बदले में भारतीय गृहणी कुछ ज्यादा अपेक्षा नहीं रखती है,अपने मान   सम्मान और घर की रानी का दर्जा मिले यही उसकी कामना रहती है.

                                          शेष अगले ब्लॉग में आपका मित्र
                                          राजेश भारद्वाज

       

Sunday, July 24, 2011

रोबोट्स ROBOTS

रोबोट्स
        
          चल पड़े है रोबोट्स
          निकल पड़े है रोबोट्स
          अपने अपने घरो से.
    
         जिनके कार्य कलाप
         नियत्रित है अपने ही
         बनाये हुए प्रोग्राम से.

        प्रोग्राम की हार्ड डिस्क में
        सेव है -
        कोई जिए या मरे
        मुझे किसी क्या लेना
        क्या देना.

        मुझे मतलब है
        अपने आप से
        या
        अपने परिवार से.

       किसी और की
       तकलीफ या दुःख से
       इन पर कोई
       असर नहीं होता.

       क्योकि संवेदन्शीलता का
       इन रोबोट्स में
       कोई प्रोग्राम सेव नहीं है ?

      चल पड़े है रोबोट्स
      निकल पड़े है रोबोट्स
      
 

Thursday, June 30, 2011

माँ : तीन दृश्य

माँ : तीन दृश्य

दृश्य एक : 
                 राम और श्याम माँ के लाडले है,ढाई तीन वर्ष के  बच्चे है दिन भर माँ - माँ करते घर के आँगन में  किलकारी भरते है.माँ भी दोनों को बहुत दुलार करती है.दोनों को  बढ़िया बढ़िया खाने  के लिए  कुछ न कुछ देती रहती है.राम कहता है माँ मेरी है - श्याम कहता है माँ मेरी है.माँ हंस के कहती है मै दोनों की हूँ.

दृश्य दो :

              राम और श्याम दोनों का ब्याह हो चुका है,माँ की अंटी में कुछ गहने है कुछ लाख रुपये की जमा पूंजी भी है.दोनों बेटो की बहुए कहती है हम माँ की सेवा करना चाहती है,हम माँ को अपने पास  रख कर माँ की सेवा करेंगी.राम और श्याम को दोनों की पत्नियों ने समझाया- माँ से कहिये वे कितने दिनों की  मेहमान है ? गहने व रुपये दोनों बेटो में बराबर बराबर बाँट दे.माँ की सेवा तो हो रही है.आखिरकार माँ ने दोनों बेटो में अपनी जमा पूंजी बाँट दी.

दृश्य तीन :

           एक दिन बड़ी बहु ने कहा -माँ को रखना केवल हमारी जिम्मेदारी ही नहीं है,छोटे बेटे का भी कोई माँ के प्रति फ़र्ज़ है.बड़े भाई ने एक दिन छोटे से कहा भाई छः महीने माँ मेरे पास रहेगी छः महीने तेरे पास रहेगी.माँ सुनती रही बेटो ने उसका बटवारा कर दिया.

          एक दिन छोटी बहु अपनी माँ से फोन पर कह रही थी - माँ बुढ़िया मरती पता  नहीं कब तक डोकरी की सेवा करनी पड़ेगी.माँ का मन खट्टा हो गया.बैग लेकर बड़े के यहाँ चल दी.दरवाजे पर ही बड़ी बहु मिल गयी माँ को देखते ही तनक गयी: माँ जी अभी तो छोटे भैया के चार महीने आपको रखने के बाकि है आप अभी से कैसे आ गई? बड़ा बेटा भी वाही खड़ा था माँ ने प्रश्न वाचक निगाहों से बेटे की और देखा.माँ बेटे के भाव समझ गयी.

        सामने ही वृधाश्रम का बोर्ड था माँ उसी और चल पड़ी

Sunday, June 26, 2011

वर्षा ऋतू का स्वागत

वर्षा ऋतू का स्वागत,
   
                                  बरसात की आती हवा,
                                  ये खेलती है डाल से,
                                  ऊचे शिखर  के भाल से,
                                  आकाश से पाताल से,
                                  मदमस्त मदमाती हवा,
                                  बरसात की आती हवा!

                                  मित्रो आप सभी को राजेश भरद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !
                                  वर्षा ऋतू ने दस्तक दे दी है.वर्षा ऋतू के आने पर सुखी टहनियों में भी कोंपले फूटने लगती है.कहने का मतलब ये है की संवेदनहीन व्यक्ति का मन भी कुछ गुनगनाने लगता है.तो आपके मेरे जैसे साहित्यिक प्रवृति के लोगो का तो कहना ही क्या!
                                 कही मन में येसुदास जी का गीत गूँज रहा होता है :
                                 तुम्हे गीतों में DHALOONGA  सावन को आने दो.

                                तो कभी मन करता है की घर से निकल कर आस पास के प्राक्रतिक स्थानों की सैर को निकल पड़े.और तेज वर्षा हो रही हो तो घर पर ही चाय काफी की चुस्कियो के साथ गरमा गरम भजिओ/पकोडियो का आनंद लिया जाये.
                      
                              कहने का मतलब ये है की वर्ष ऋतू सभी के लिए खुशियों का सन्देश लेकर आती है.खासकर किसान भाइयो के लिए.
                              शहर में लोग पिकनिक मानाने के लिए निकल पड़ते है.सभी वर्षा ऋतू का भरपूर आनंद लेना चाहते है हम इससे वंचित क्यों रहे -आप घूमिये पिकनिक मनाइए बारिश का आनंद लीजिये.सावन के गीत गुनगुनाइए:
                 
                              शेष अगले ब्लॉग में आपका मित्र राजेश भारद्वाज

Thursday, June 2, 2011

सत्याग्रह बाबा रामदेव

सत्याग्रह बाबा रामदेव
                                    सर्वप्रथम मित्रो को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !
                                    मित्रो बाबा  रामदेव  4 जून से से सत्याग्रह करने जा रहे है.देश की आम जनता उनके साथ तन और मन से है.बाबा रामदेव  के हृदय में जो सच्चाई की चिंगारी है,उसे आम जन पहचान गया है.भारत की आम जनता जन गयी है की कोई उनका आज के समय में मसीहा है तो वो बाबा  रामदेव ही है.

                                    मीडिया भी रामदेव के आन्दोलन में उनका पूरा साथ दे रहा है.मीडिया की भूमिका भी प्रसंशनीय  है.इलेक्ट्रोनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया का स्टाफ बधाई का पात्र है.बाबा रामदेव की मांगे जायज है.परन्तु सत्ता के लोग उन्हें आसानी से मन लेंगे इसमें संदेह है. सत्ता को कुछ लोग अपनी जागीर मान कर चल रहे है.उन्हें अपना आसन डोलता दीख रहा है.

                                 बाबा रामदेव  अनशन   पर  बैठेंगे  और आम जनता का उन्हें भरपूर समर्थन मिलेगा इसमें संदेह नहीं है. बाबा रामदेव के साथ हमें भी अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए  !
                                   

Sunday, May 22, 2011

अँधेरे में जो बैठे है

अँधेरे में जो बैठे है:
                               मित्रों सर्वप्रथम आप सभी को राजेश भारद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार!      
                               आज हमारे देश के शीर्ष उद्योगपति श्री रतन टाटा ने अम्बानी की बहुचर्चित महलनुमा बिल्डिंग की और इशारा करते हुए कहा है कि आमिर और संपन्न लोगो को अपने आस पास रह रहे अन्य लोगो के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कुछ अवश्य करना चाहिए.उनका यह विचार स्वागत योग्य है.
                              
                              प्रश्न यह है कि कैसे हम लोगो का जीवन बेहतर बना सकते है?  क्या केवल दान दे कर हम अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाते है.दान केवल उन्ही लोगो को दिया जाना चाहिए जो किसी भी प्रकार का कार्य करने में अक्षम है.
                            
                             शेष लोगो को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध करा के हम लोगो के जीवन को बेहतर बना सकते है.

                             कभी   अंबानी अपनी पत्नी को करोड़ो का प्लेन उपहार में देते है कभी भव्य बहुमंजिला ईमारत बनवाकर अपने सम्पन्नता का बखान करते है.उनकी इसी बात पर शेर याद आ रहा है :
                                एक शहंशाह ने  बनवा  के  हंसी  ताजमहल!
                                हम गरीबो कि मोहब्बत का
                                उड़ाया है मजाक !!
                        
                            ब्लॉग का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिपण्णी करना नहीं है.श्री रतन टाटा कि बात ध्यान देने योग्य एवम विचार सराहनीय है.ब्लॉग के माध्यम से मई भी सभी संपन्न और सक्षम लोगो से विनम्र विनती है कि सभी लोगो का जीवन बेहतर हो एसा प्रयास करे.क्योकि कोशिशे अक्सर कामयाब हो जाती है: फिर एक फ़िल्मी गाने कि लेने याद आ रही है :
      
                          अँधेरे में जो बैठे है,नजर उन पर भी एक डालो,
                          अरे ओ रोशनी वालो!!

Sunday, May 15, 2011

CHARITY BEGINS AT HOME

CHARITY BEGINS AT HOME
                                                  मित्रो आप सभी को राजेश भरद्वाज का स्नेह भरा नमस्कार !
                                                  इन दिनों हमारे युवा मित्रो की ग्रीष्म कालीन छुट्टियाँ चल रही है और आप सभी लोग इन छुट्टियों का अनद जी भर के ले रहे होंगे.
                                                   आज के विषय पर  आते है,आज हमारी आदत व्यवस्था,सरकार और अन्य सरकारी विभाग के कर्मचारियों को कोसने की हो गई है.सरकार में कोन लोग है ,सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कोन लोग है ? क्या वे विदेश से आये हुए लोग है?नहीं वे हम आम जनता से आये हुए लोग ही है.
                                                  मै ये कहना चाहता हूँ कि हम आम लोगो से निकल कर ही लोग रेलवे,बैंक या अन्य सरकारी कार्यालयों में कार्य करते है.इन सरकारी विभागों में कार्य कर रहे लोग व्यक्तिगत आधार मन में यह दृढ निश्चय कर ले कि मै अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी और लगन के साथ करूंगा और आम आदमी और गरीब आदमी का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करूंगा.तब लोग कि आधी समस्याए स्वतः  हल हो जाएगी.आम जन के कार्य सुचारू रूप से होने लगेंगे.
                                                 कबीर दास जी का कथन है कि :
                               
                                                 बुरा जो देखन मै चला,बुरा न मिल्या कोई !
                                                 जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा ना कोई !!

                                                शायद मेरे मित्र मेरी बात समझ गए होंगे,यदि इसक कुछ प्रतिशत भी पालन करेंगे तो काफी लोगो कि जिंदगी सहज हो जाएगी.

                                                 आपका मित्र राजेश भारद्वाज
                                                                                 

                                          

                                            
                                                
                                          

Sunday, May 8, 2011

MOTHERS DAY

MOTHERS DAY,

                           मित्रो आज मदर्स   डे है.इस दिन को कैसे मनाया जाता है ये आप  अच्छी तरह से जानते है.पर आप बताओ क्या माँ को एक दिन ही सम्मान दिया जाना चाहियें,इसी प्रकार फादर्स डे भी मनाया जाता है. क्या हमारे परेंट्स जो हमारे लिए अमूल्य है-क्या हम उन्हें एक विशेष दिन को कार्ड या गिफ्ट देकर अपने कर्तव्य की पूर्ति कर सकते है?

                          माँ के चरणों में संसार है-ये बात एक प्राचीन  कथा से पहले ही हमें समझाई जा चुकी है- गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय में प्रतियोगिता  रखी गई -जो संसार का पहले चक्कर लगाकर आयेगा वही श्रेष्ठ माना जायेगा.
                     
                           कार्तिकेय संसार का चक्कर लगाने अपने वहां पर निकल पड़े.गणेश जी अपनी माँ पार्वती जी की परिक्रमा लगा कर वापस आ गए.जब उनसे कहा गया की उन्होंने एसा क्यों किया तो उन्होंने कहा की माँ चरणों में ही संसार है.तब गणेश जी को विजेता घोषित किया गया.हिन्दू धरम में कोई भी शुभ कार्य करते है तो इसी कारण  उनकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है.

                          मदर्स डे या फादर्स डे तो पश्चिमी सभ्यता की उपज है.कार्ड्स या गिफ्ट  आइटम की बिक्री बढाने का एक प्रयास है.भारत में तो माता पिता को सदा ही,हर दिन सम्मान दिया जाता है उनकी ईश्वर  के समान इज्जत की जाती है.और माँ ------

                           माँ तो है माँ,माँ तो है माँ -माँ जैसी दुनिया में है कोई कहाँ